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जीवन की चेतावनी


(Bhaktiratna Sadhu Maharaj) #1

:rose: जीवन की चेतावनी

:hibiscus: नाम कीर्तन, नाम जप, नाम गुंजन, नाम लेखन, और लीला गान द्वारा नाम-स्मरण करो, अन्त में केवल नाम ही काम आवेगा | धन, सम्पति, परिवार, मकान कुछ काम नहीं आवेगा | अभी तक जिन कामों को करते हुए, आपको नाम स्मरण के लिये बिल्कुल समय ही नहीं मिलता है, तो अन्त में क्या होगा ? हाय ! हमने कुछ नहीं किया | यह सारा किया हुआ काम-धन्धा कुछ नहीं आत्मा में भर्ती होने वाला है | मनुष्य कहता है कि नाम भजन के लिये समय नहीं मिलता |

:hibiscus: हे निताइ ! कितनी सारी भूल ! बच्चा जन्मता है, तो बड़ा होगा कि नहीं होगा, इसमें सन्देह है I पढेगा कि नहीं पढेगा, इसमें सन्देह है I विवाह होगा कि नहीं होगा, इसमें सन्देह है; परन्तु मरेगा कि नहीं मरेगा, इसमें सन्देह नहीं है | मरना तो पड़ेगा ही | परन्तु जिन कामों में सन्देह है उन्हें तो तत्परता से कर रहा है, परन्तु जिन काम में सन्देह नहीं, जाना तो पड़ेगा जरुर, उसके लिये कोई तैयारी ही नहीं | बड़े आश्चर्य की बात है | यह बड़ी भारी भूल है | अत: सावधान हो जाओ |

:hibiscus: मैं एक सच्ची बात कहता हूँ | वह यह है कि सिवाय भगवान निताइ अपना कलियुग में कोई नहीं है | मन, बुध्दि, इन्द्रियाँ, श्वास आदि कोई आपके नहीं | परन्तु निताइ को आप अपना मान लें तो प्रभु छोड़ नहीं सकते आपको | ये सब चीजें, जिनके पीछे आप पड़े हैं, आपकी बात कोई मानने वाला नहीं है | जिस शरीर की आप सदा रक्षा करते हो, उससे एक दिन रात्रि में भूल से कपड़ा अलग रह जाय तो जाड़ा लग जाता है | शरीर ख्याल नहीं करता कि कितने दिन हमने उसकी रक्षा की, एक दिन मैं भी क्षमा कर दूँ, इतने वर्षों से अन्न जल दिया | दो दिन अन्न जल बन्द कर दे तो इस शरीर की क्या दशा होती है ? शरीर इतना कृतघ्न है कि दो दिन में ही पोल निकाल देता है

:hibiscus: तो ऐसे कृतघ्न शरीर के तो हम बन गये गुलाम, और जो भगवान निताइ केवल याद करने मात्र से दौड़ते हैं उन भगवान का हम नाम ही नहीं करते | बिना याद किये भी उन भगवान ने हमे विद्या, बुध्दि, ज्ञान, शरीर, जीवन आदि सभी दिये हैं और देते ही रहते हैं | इतने विलक्षण ढंग से देते हैं कि उनका दिया हुआ अपना ही मालूम होता है | ऐसे परम सुहृद भगवान को भूल गये यह भारी भूल है |

:hibiscus: “सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छ्ती |”

:hibiscus: हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हर
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे

:hibiscus: निताइ निताइ
निताइ निताइ
निताइ निताइ
निताइ निताइ